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जहां मंत्री ने छापा मारा, विभाग पहले ही दे चुका क्लीनचिटः- पहले भी जांच के लिए भेजे गए थे दल, रिपोर्ट नही आई, अधिकारियों पर मिलीभगत का शक…

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ओमप्रकाश बांगड़वा, सांचौर। राजस्थान में किसानों के साथ नकली खाद-बीज को लेकर धोखाधड़ी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की छापेमारी से खाद-बीज निर्माता कंपनियों में हड़कंप मच गया है। अब इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों पर भी मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

इस कार्रवाई के 6 महीने पहले कृषि आयुक्तालय ने आधा दर्जन टीमें बनाकर इन फैक्ट्रियों की जांच के लिए भेजा था। उन जांच दल ने कोई एक्शन नहीं लिया। यहां तक कि क्लीनचिट दे दी गई थी। कृषि आयुक्तालय के पास 6 महीने बाद भी उसका जवाब नहीं है।

अजमेर में जहां मंत्री ने छापेमारी कर नकली खाद पकड़ी, उनमें से एक फैक्ट्री को तो विभाग ने ही क्लीन चिट दे दी थी।

ये है पूरा मामला-

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने सबसे पहले 29 और 30 मई को 2 दिन लगातार अजमेर के किशनगढ़ में कार्रवाई की। इसमें नकली खाद बनाने की फैक्ट्री भी पकड़ी थी। पहले दिन 29 मई को तो फैक्ट्री पर छापा मारने के लिए मंत्री किरोड़ी लोडिंग टेम्पो में बैठकर पहुंचे थे।

किशनगढ़ में उन्होंने 12 फैक्ट्रियों की जांच की थी। इसमें नकली डीएपी, एसएपी और पोटेशियम बनाने का खुलासा हुआ। यहां मार्बल के कचरे, बजरी, मिट्टी से खाद बनाई जा रही थी। फिर 30 मई को मंत्री जांच करने पहुंचे तो एक-दो जगह कर्मचारी ताला लगाकर भाग चुके थे। इस दिन 5 फैक्ट्रियों को सील किया गया।

3 और 4 जून को अचानक श्रीगंगानगर में छापा मारा। RIICO इलाके के शंकर सीड्स, शक्ति सीड्स और हार्वेस्टर फूड पर एक साथ छापेमारी की। मंत्री ने बताया- हार्वेस्टर फूड बीज भंडार में एक्सपायरी बीजों को नई थैलियों में पैक किया जा रहा था। बीजों पर रंग चढ़ाकर उन्हें नया दिखाया जा रहा था।

मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की छापेमारी के बाद विभाग एक्टिव हुआ। ब्यावर, कपासन, उदयपुर और जयपुर में भी उर्वरक फैक्ट्री की जांच की गई। कृषि मंत्री की छापेमारी के बाद विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत का शक और उनकी कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।

जिन्हें मंत्री ने पकड़ा, उन्हें पूर्व में दे चुके हैं क्लीनचिट-

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की छापेमारी के बाद 16 फैक्ट्री सील कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से एक फैक्ट्री को पूर्व में कृषि आयुक्तालय क्लीनचिट दे चुका है। अजमेर के किशनगढ़ के तिलोनिया स्थित मैसर्स ट्रॉपिकल एग्रो सिस्टम के सैंपल जांच में मानक पाए गए थे। जबकि मंत्री ने यहां छापा मारकर प्रोम खाद के 980 बैग और करीब 4000 बैग पकड़े हैं। दावा किया जा रहा है कि ये नकली हैं।

इसी तरह श्रीगंगानगर जिले में 12 बीज उत्पादक इकाइयों का निरीक्षण किया गया। इसमें 35 बीज नमूने लेने के साथ ही 1908.11 क्विंटल बीज पर 30 दिन तक विक्रय पर रोक और 110.27 क्विंटल बीज जब्त करने की कार्रवाई की गई।

6 महीने पहले विभाग की टीमों ने छापा मारा था, लेकिन रिपोर्ट बाहर नहीं आई-

कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा की छापामार कार्रवाई के बाद ये सामने आया है कि कृषि आयुक्तालय ने 6 महीने पहले अजमेर और ब्यावर जिले में स्थित जैव/कार्बनिक उर्वरक विनिर्माण इकाइयों के निरीक्षण और सैंपल लेने के लिए एक प्रदेशस्तरीय टीम का गठन किया था। उस टीम ने तब क्या जांच की, यह अब तक सामने नहीं आया है।

उच्च स्तरीय सूत्रों ने बताया कि न तो टीम ने कोई जांच की और न ही कोई रिपोर्ट पेश की। कृषि आयुक्तालय के पास उस टीम द्वारा की गई कार्रवाई की कोई रिपोर्ट तक नहीं है। अब इस मामले में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कृषि आयुक्तालय से इस जांच टीम की कार्रवाई की पत्रावलियां तलब की हैं।

दरअसल, बीज, उर्वरक और पेस्टीसाइड की जांच के लिए कृषि विभाग में गुणवत्ता नियंत्रण विंग बनी हुई है। इस विंग में प्रदेशभर में 744 इंस्पेक्टर हैं, जो समय-समय पर बीज-उर्वरक और पेस्टीसाइड निर्माताओं के सैंपल लेकर राज्य सरकार के अधीन आने वाली लैब से जांच करवाते हैं। जांच में अमानक पाए जाने पर निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन खेल यहीं से शुरू होता है।

कौन-कौन था प्रदेश स्तरीय जांच दल में शामिल-

कृषि आयुक्तालय के 27 दिसंबर 2024 को आदेश जारी किया था। 6 निरीक्षण दल अजमेर और ब्यावर भेजे गए थे। इन 6 अलग-अलग जांच दलों का नेतृत्व तत्कालीन संयुक्त निदेशक गजानंद यादव, उप निदेशक बंशीधर जाट, सहायक निदेशक ज्वाला प्रताप सिंह, सहायक निदेशक गोविंद सिंह, सहायक निदेशक मुकेश कुमार चौधरी और कृषि अधिकारी राजवीर को दिया गया था।

जांच दलों के अधिकारियों को 10 जनवरी 2025 तक कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे। सूत्रों के अनुसार, इन जांच दलों ने क्या कार्रवाई की, किन-किन जगहों से सैंपल लिए, सैंपल की जांच किन लैब में कराई और लैब की क्या रिपोर्ट आई? ये अब तक सामने नहीं आ पाया है।

पिछले एक साल में की गई कार्रवाइयों का रिपोर्ट कार्ड-
कृषि विभाग की ओर से पिछले एक साल के दौरान फर्टिलाइजर के 18 हजार 921 सैंपल लिए गए, जिनमें से 392 सब स्टैंडर्ड पाए गए। इसी तरह बीज के 6 हजार 382 सैंपल लिए गए, जिनमें से 190 सब स्टैंडर्ड पाए गए। वहीं 2804 कीटनाशकों के सैंपल लिए गए, जिनमें से 101 मिस ब्रांड पाए गए।

अब विभाग के अधिकारी कह रहे- 18 में से 16 फैक्ट्रियों में अनियमितता-

कृषि विभाग में जॉइंट डायरेक्टर, क्वालिटी कंट्रोल केके मंगल बताते हैं- 18 में से 16 फैक्ट्री में अनियमितता पाई गई है। अब तक 58 सैंपल लिए गए हैं और फैक्ट्री सील करने के साथ ही एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान कई डॉक्यूमेंट नहीं पाए गए। मंत्री की जांच के दौरान उर्वरक में मिलावट की भी बात सामने आई है। सैंपल की जांच चल रही है। कई चीजें संदेहास्पद पाई गई हैं।

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