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बीएसएफ (BSF) को मिलेगी डिजिटल कॉम्बैट यूनिफ़ॉर्मः- रेगिस्तान की गर्मी और पंजाब-बंगाल की नमी में भी कंफर्टेबल, 10 साल बाद हुआ बदलाव।

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News 9 Rajasthan देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात देश की पहली रक्षा पंक्ति सीमा सुरक्षा बल (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स- BSF) के जवान अब जल्द ही एक नए और मॉडर्न लुक में नजर आएंगे। BSF की वर्दी में कई सालों बाद बड़ा बदलाव किया गया है।
ये बदलाव केवल वर्दी के कलर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके फैब्रिक, डिज़ाइन और उपयोगिता में भी क्रांतिकारी परिवर्तन शामिल हैं। BSF की ये नई वर्दी अब डिजिटल कॉम्बैट पैटर्न में होगी, जो न केवल दिखने में आकर्षक है, बल्कि ऑपरेशन के लिहाज से भी अधिक उपयोगी और टिकाऊ मानी जा रही है।
वैसे सीमा सुरक्षा बल ने साल 1965 में स्थापना के बाद कई बार वर्दी में बदलाव किए हैं, मगर आखिरी बार बदलाव साल 2010-11 में बदलाव किया था। उसके बाद साल 2015 में, यानी अब करीब 10 साल बाद वर्दी में बदलाव हो रहा है।

2 साल में डिजाइन हुई नई ड्रेस-

करीब 2 साल में इसको डिजाइन करना और विपरीत परिस्थतियों में इसको बनाने के बाद जांचा गया। 80 प्रतिशत कॉटन, 19 प्रतिशत पॉलिएस्टर और 1 प्रतिशत स्पैन्डेक्स से बनी होगी। इससे यह वर्दी और अधिक सांस लेने योग्य, हल्की, लचीली और गर्म मौसम के अनुकूल हो जाएगी।
यह कपड़ा खासतौर पर राजस्थान के रेगिस्तानी और पंजाब-बंगाल के आर्द्र इलाकों के लिए उपयुक्त रहेगा। क्योंकि भीषण गर्मी में पतले फेब्रिक्स के कारण इसमें सांस लेना ज्यादा आसान होगा। साथ ही पुरानी वर्दी में कपड़ा मोटा होता था, लेकिन ये कपड़ा पतला है। जवानों और अधिकारियों को ये ड्रेस पहनकर राजस्थान, पंजाब और बंगाल में अभ्यास किया। उनके ही फीडबैक के आधार पर इस वर्दी को तैयार किया गया है।

30 फीसदी बढ़ाया गया कॉटन-

अब तक BSF की कॉम्बैट ड्रेस में 50 फीसदी कॉटन और 50 फीसदी पॉलिएस्टर का मिश्रण उपयोग में लिया जाता था। लेकिन नई वर्दी में फैब्रिक का बड़ा बदलाव किया गया है। यह अब 80 प्रतिशत कॉटन से बनी होगी। इससे यह वर्दी और अधिक सांस लेने योग्य, हल्की, लचीली और गर्म मौसम के अनुकूल हो जाएगी। यह कपड़ा खासतौर पर राजस्थान के रेगिस्तानी और पंजाब-बंगाल के आर्द्र इलाकों के लिए उपयुक्त रहेगा। क्योंकि राजस्थान के रेतीले इलाकों में जहां भीषण गर्मी में तापमान 50 डिग्री से भी ऊपर चला जाता है उस जगह इसका पतला फेब्रिक्स काफी राहत देगी। वहीं बंगाल आदि राज्य जहां उमस काफी रहती है, वहां भी इस ड्रेस में कॉटन की मात्रा बढ़ाए जाने से सांस लेने में आसानी रहेगी।

डिजिटल प्रिंट में 3 रंगों का समावेश

नई वर्दी को 3 प्रमुख रंगों के संयोजन से तैयार किया गया है– 50 प्रतिशत खाकी, 45 प्रतिशत हरा और 5 प्रतिशत भूरा। इस विशेष रंग संयोजन का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार जवानों को बेहतर कैमोफ्लाज सुविधा देना है। यानी यह वर्दी दुश्मनों की नजरों से छिपने में मदद करेगी और ऑपरेशन के दौरान जवानों को अधिक सुरक्षा प्रदान करेगी।

तकनीक और सुरक्षा का मेल है डिजिटल पैटर्न-

इस बार पहली बार BSF की वर्दी में डिजिटल प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। यह तकनीक केवल वर्दी को स्टाइलिश नहीं बनाती, बल्कि दुश्मनों के लिए जवानों की मौजूदगी को भ्रमित करना भी आसान बनाती है। डिजिटल पैटर्न वाले कपड़े जल्दी खराब नहीं होते और लंबे समय तक अपनी रंगत व गुणवत्ता बनाए रखते हैं। इससे यह वर्दी न केवल ऑपरेशनल स्तर पर बेहतर प्रदर्शन देगी, बल्कि आर्थिक रूप से भी अधिक टिकाऊ साबित होगी।

फील्ड ट्रायल के बाद किया गया अंतिम निर्णय-

BSF मुख्यालय ने जवानों की राय और फील्ड ट्रायल के बाद इस नई वर्दी को स्वीकृति दी है। सीमा सुरक्षा बल के सीमान्त मुख्यालय राजस्थान के IG एमएल गर्ग ने बताया- जवानों से लगातार प्रतिक्रिया ली गई, अलग-अलग क्षेत्रों में इसका परीक्षण किया गया और अंत में एक ऐसा डिज़ाइन चुना गया, जो सभी भौगोलिक और ऑपरेशनल स्थितियों में कारगर साबित हो। इस प्रक्रिया में फैब्रिक विशेषज्ञों और डिजाइनरों की मदद ली गई, ताकि जवानों को पहनने में भी यह वर्दी बेहतर अनुभव दे सके।

एक साल में पूरी फोर्स अपनाएगी नई ड्रेस-

वैसे सीमा सुरक्षा बल ने साल 1965 में स्थापना के बाद कई बार वर्दी में बदलाव किए हैं, मगर आखिरी बार बदलाव साल 2010-11 में बदलाव किया था। और उसके बाद साल 2015 में, यानी करीब 10 साल बाद वर्दी में बदलाव हो रहा है।
बीएसएफ IG ML गर्ग ने बताया- इस बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आने वाले 12 महीनों के भीतर पूरे बल को नई वर्दी में देखा जाएगा। धीरे-धीरे सभी इकाइयों को यह वर्दी मुहैया करवाई जा रही है। उनका कहना है कि यह बदलाव केवल बाहरी लुक तक सीमित नहीं है, बल्कि जवानों की कार्यक्षमता, मनोबल और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
IG गर्ग ने बताया- नई वर्दी जवानों को लंबे समय तक ड्यूटी पर सहज और आत्मविश्वासी बनाए रखेगी। विशेष रूप से गर्मी और उमस वाले इलाकों में यह वर्दी अधिक प्रभावी साबित होगी। नई वर्दी जवानों की कार्यक्षमता में इजाफा करेगी और उन्हें कठिन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगी।

देश की सुरक्षा में मॉडर्न कदम-

BSF की यह नई वर्दी देश की सुरक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह न केवल भारत की सीमा सुरक्षा में लगे जवानों को नई पहचान देगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य छवि को भी और अधिक सशक्त बनाएगी। नई वर्दी के साथ जब जवान सीमा पर तैनात होंगे, तो वे सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि देश के आत्मसम्मान और शक्ति का प्रतीक बनेंगे।

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