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ओमप्रकाश बांगड़वा, सांचौर।
https://news9rajasthan.com/?p=552&preview=true रानीवाड़ा तहसील कार्यालय में एक व्यक्ति ने रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। गोवाराम नामक युवक का कहना है कि जब उसने तहसीलदार को रिश्वत देने से इनकार किया, तो न केवल उसकी पत्नी के नाम रजिस्ट्री करने से मना कर दिया गया, बल्कि उसके मूल दस्तावेज जब्त कर लिए गए और शांतिभंग का बहाना बनाकर पुलिस तक बुला ली गई।
ये है पूरा मामला-
https://news9rajasthan.com/?p=552&preview=true पीड़ित गोवाराम ने बताया कि उसके पास पुश्तैनी जमीन पर बुआ और बहनों की पावर ऑफ अटॉर्नी है, जिसके आधार पर वह 23 मई को तहसील कार्यालय में पत्नी के नाम जमीन ट्रांसफर करवाने गया था। गोवाराम के अनुसार, तहसीलदार ने रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया और पावर ऑफ अटॉर्नी के ओरिजिनल दस्तावेज जब्त कर लिए।
https://news9rajasthan.com/?p=552&preview=true जब उसने दस्तावेज वापस मांगे, तो पुलिस बुलाकर उस पर शांतिभंग का आरोप लगाने की कोशिश की गई। गोवाराम का कहना है कि उससे जबरन यह लिखवाने को भी कहा गया कि उसने दस्तावेज प्राप्त कर लिए हैं, लेकिन उसने इनकार कर दिया। पुलिसकर्मी मौके से चले गए, पर दस्तावेज अब तक वापस नहीं मिले हैं।
1.35 लाख रुपए जमा करवाएं थे
https://news9rajasthan.com/?p=552&preview=true गोवाराम ने बताया कि तहसील कार्यालय में सीधे काम नहीं होता और उसे स्टांप वेंडर व दलाल राहुल वैष्णव के माध्यम से दस्तावेज तैयार करवाने पड़े। राहुल ने बताया था कि पावर ऑफ अटॉर्नी के केस में डबल चार्ज लगता है और एक गवाह तथा जनाधार पर्याप्त होते हैं। इस आधार पर गोवाराम ने करीब 1.35 लाख रुपए जमा करवाए, लेकिन तहसीलदार ने फिर से रजिस्ट्री करने से मना कर दिया और कहा कि दो गवाह जरूरी हैं और जनाधार नहीं चलेगा।
https://news9rajasthan.com/?p=552&preview=true गोवाराम का कहना है कि इससे एक दिन पहले, 22 मई को, उसने अपने भाई की पावर के आधार पर एक अन्य जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी, जो दलाल के माध्यम से हुई थी और तहसीलदार के सामने वह खुद पेश हुआ था। तब ऐसी कोई आपत्ति नहीं की गई थी। लेकिन इस बार दलाल के बजाय तहसीलदार के सामने में खुद पेश हुआ था।
https://news9rajasthan.com/?p=552&preview=true गोवाराम ने बताया-विवाद के बाद अगले दिन 24 मई को राहुल वैष्णव ने 38 हजार रुपए ऑनलाइन वापस लौटा दिए। वॉट्सऐप पर लिखा-आप गुस्से में थे इसलिए बात नहीं हो पाई थी। हिसाब में आपके रुपए ज्यादा आ गए थे। जो लौटा दिए हैं।
“तहसीलदार ने सफाई देते हुए कहा कि गोवाराम के दस्तावेजों में काट-छांट की गई थी, इसलिए रजिस्ट्री रोकी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में पावर ऑफ अटॉर्नी से संबंधित एक नया अधिनियम पारित हुआ है, जिसकी अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है और कई स्थानों पर ऐसे मामलों में रजिस्ट्री रोक दी गई है।”
https://news9rajasthan.com/?p=552&preview=true हालांकि तहसीलदार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि गोवाराम के ओरिजिनल दस्तावेज क्यों जब्त किए गए और उन्हें अब तक क्यों नहीं लौटाया गया।



