(टीकम पाल) जालोर – शिक्षक समाज का आईना है” कहावत का अर्थ यह है कि शिक्षक जिस तरह का ज्ञान, नैतिकता और मूल्य प्रदान करते हैं, वह सीधे तौर पर समाज की स्थिति और भविष्य को दर्शाता है। उनके द्वारा बच्चों को जिस शिक्षा के सांचे में ढाला जाए वह उसी में ढ़लते हैं।
जो बच्चे सही रूप में शिक्षा को आत्मसात कर गुरु के आदर्शों के साथ आगे बढ़ते हैं वही बच्चे देश व समाज के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कहते हैं कि बिना गुरु के भगवान के भी दर्शन नहीं होते हैं, क्योंकि गुरु ही हमारे जीवन में ज्ञान का दीपक जलाते हैं।
शिक्षक की तुलना कुम्हार से की गई है, जो बाहर से मिट्टी पर थपकी तो लगाता है लेकिन उतने ही स्नेह से घड़ा को आकार प्रदान करता है। संस्कार के साथ शिक्षा प्रदान करने वाले गुरुओं का महत्व आज भी है। शिक्षक को समाज निर्माता माना जाता है।
शिक्षकों ने गुलामी से मुक्ति दिलाने से लेकर आजाद भारत में आम जनता को जागरूक करने में भी अपनी सहभागिता दी है। शिक्षित समाज की स्थापना में शिक्षकों के शिक्षित समाज की स्थापना में शिक्षकों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है।
ऐसे में जालोर जिले में भी एक ऐसे सेवानिवृत्त शिक्षक जयनारायण परिहार हैं, जो बच्चों के जीवन में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं ! जी हां ! पिछले वर्ष राजकीय विद्यालय शहरी स्कूल जालोर पीटीआई पद से सेवानिवृत्त हुए शिक्षक परिहार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सैकड़ों समाज के युवाओं को छात्रावास के जरिए संस्कार के साथ निःशुल्क शिक्षा दे रहे है।
सेवानिवृत्त परिहार के मार्गदर्शन में विगत आठ सालों में करीब एक हजार से अधिक युवाओं का राजकीय सेवाओं में चयन हुआ है ! सेवानिवृत्त शिक्षक परिहार वर्तमान में धवला रोड़ जालोर स्थित मेघवाल समाज छात्रावास में बतौर वार्डन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले करियर गाइडेंस समारोह में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रतिभागियों को उचित मार्गदर्शन भी प्रदान कर रहे हैं।



