HomeNews34 साल बाद पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बना दक्षिण अफ़्रीकाः- 1 फाइनल,...

34 साल बाद पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बना दक्षिण अफ़्रीकाः- 1 फाइनल, 12 सेमीफाइनल गँवाने के बाद इतिहास में दूसरा आईसीसी ख़िताब जीता…

Date:

Related stories

सांचौर पंचायत समिति में 14 ग्राम पंचायतें बनी,पुनर्गठन के बाद 46 हुई ग्राम पंचायतें, अधिसूचना जारी

ओमप्रकाश बांगड़वा, सांचौर। राजस्थान सरकार के ग्रामीण विकास एवं...

जालोर में गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत अभी 7,83,662 गणना प्रपत्रों का हुआ डिजिटलीकरण

ओमप्रकाश बांगड़वा, सांचौर। जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ प्रदीप के....

गोलासन में आंजणा प्रीमियर लीग की शुरुआत, क्रिकेट में 32 टीम और वॉलीबॉल में 16 टीमें ले रही भाग

ओमप्रकाश बांगड़वा, सांचौरः- https://news9rajasthan.com/?p=2047&preview=true सांचौर के गोलासन में आंजणा प्रीमियर लीग...

श्रावण के अंतिम दिन पर मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

प्रियंक दवे, सायला/News9Rajasthan:- कस्बे सहित क्षेत्रभर में श्रावण मास...

साउथ अफ्रीका की क्रिकेट टीम ने ‘चोकर्स’ का दाग आखिरकार हटाकर ‘वर्ल्ड चैंपियन’ का टैग हासिल कर लिया। हटाया भी कैसे, तीनों फॉर्मेट में 8 बार की वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को ‘होम ऑफ क्रिकेट’ द लॉर्ड्स में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का फाइनल हराकर। कप्तान टेम्बा बावुमा, बैटर ऐडन मार्करम और पेसर कगिसो रबाडा ने ऐतिहासिक जीत की इबारत लिखी।

1991 में 22 साल बैन के बाद क्रिकेट में वापसी करने वाले साउथ अफ्रीका ने इससे पहले तीनों फॉर्मेट के अलग-अलग वर्ल्ड कप में 1 फाइनल और 7 सेमीफाइनल गंवाए थे। WTC से पहले टीम की इकलौती ICC ट्रॉफी भी 1998 में चैंपियंस ट्रॉफी के रूप में आई। इस टूर्नामेंट में भी टीम ने 5 सेमीफाइनल गंवा दिए। 27 साल तक लगातार हार के बाद साउथ अफ्रीका को अब जाकर किसी ICC टूर्नामेंट को जीतने की खुशी मिली।

साउथ अफ्रीका के 12 सेमीफाइनल और 1 फाइनल हारने के बाद चैंपियन बनने की कहानी-

1991 में साउथ अफ्रीका की वापसी हुई-

1970 तक साउथ अफ्रीका की क्रिकेट टीम में सिर्फ श्वेत खिलाड़ियों को मौका मिलता था। साउथ अफ्रीका उन टीमों के खिलाफ कोई मैच नहीं खेलता था जिनमें एक भी अश्वेत खिलाड़ी हो। इसलिए वह भारत, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान जैसी टीमों से नहीं खेलता था। साउथ अफ्रीका की रंगभेद नीति का भारत और वेस्टइंडीज ने कड़ा विरोध किया और अफ्रीका पर 22 साल का बैन लग गया। यह बैन 1991 में तय समय से करीब एक साल पहले हटा। इसके बाद साउथ अफ्रीका ने सबसे पहले भारत का ही दौरा किया।

1992 में साउथ अफ्रीका ने पहली बार किसी ICC टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। तब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की मेजबानी में हुए वनडे वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका सेमीफाइनल तक पहुंचा। सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को बारिश के अटपटे नियम की वजह से हार गया।

6 सेमीफाइनल गंवाए, 1 भी फाइनल नहीं-

1992 में ICC टूर्नामेंट में अच्छी शुरुआत के बाद 1996 से 2015 तक टीम 6 में 5 बार नॉकआउट राउंड में पहुंची, लेकिन कभी क्वार्टर फाइनल तो कभी सेमीफाइनल हारकर बाहर हो गई। 2003 और 2019 में टीम नॉकआउट राउंड में नहीं पहुंच सकी।

2023 में साउथ अफ्रीका ने फिर कमबैक किया और सेमीफाइनल खेला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार गए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम ने यह वनडे वर्ल्ड कप में तीसरा सेमीफाइनल गंवाया था। इसके अलावा टीम 2 बार न्यूजीलैंड और एक-एक बार वेस्टइंडीज और इंग्लैंड से भी नॉकआउट हारी। टीम ने एकमात्र नॉकआउट मैच 2015 में जीता, तब साउथ अफ्रीका ने क्वार्टर फाइनल में श्रीलंका को हराया था। हालांकि, इस टूर्नामेंट के भी सेमीफाइनल में टीम को हारकर बाहर होना पड़ गया।

भारत ने इकलौता फाइनल हराया-

क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट का वर्ल्ड कप जब 2007 में शुरू हुआ तो ICC ने साउथ अफ्रीका को ही इसकी मेजबानी दे दी। टीम ने पहले ही मैच में वेस्टइंडीज को हरा दिया। सुपर-8 में भी टीम ने लगातार 2 मैच जीत लिए, लेकिन आखिरी मैच भारत से हारकर ग्रुप स्टेज से बाहर होना पड़ा।

2009 में साउथ अफ्रीका फिर सेमीफाइनल तक पहुंचा, लेकिन इस बार पाकिस्तान से हार गया। 2010 और 2012 में ग्रुप स्टेज से बाहर हुआ। 2014 में सेमीफाइनल तक पहुंच गया, लेकिन भारत से ही हारकर बाहर होना पड़ा।

2016 से 2022 तक टीम फिर ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई और पिछले साल 2024 में पहली बार फाइनल में जगह बना ली। टीम ने अफगानिस्तान को सेमीफाइनल हराया और पहली बार टी-20 वर्ल्ड कप में कोई नॉकआउट मुकाबला जीता। साउथ अफ्रीका के पास भारत को हराकर चैंपियन बनने का मौका था। फाइनल में टीम को एक समय 30 गेंद पर महज 30 रन चाहिए था, लेकिन साउथ अफ्रीका को 7 रन से हार मिल गई।

खिताब के बाद 5 सेमीफाइनल गंवाए-

1998 में ICC ने पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी के रूप में अपना दूसरा 50-ओवर टूर्नामेंट शुरू किया। इसका नाम कभी विल्स इंटरनेशनल तो कभी नॉकआउट ट्रॉफी हुआ, लेकिन अब इसे चैंपियंस ट्रॉफी के नाम से पहचाना जाता है। साउथ अफ्रीका ने इसमें शानदार प्रदर्शन किया और लगातार 3 नॉकआउट मैच जीतकर ट्रॉफी भी उठाई। जैक्स कैलिस प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बने।

यह साउथ अफ्रीका की सीनियर क्रिकेट टीम का 13 जून 2025 तक पहला और इकलौता ICC खिताब रहा। इसके बाद टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी में 7 बार हिस्सा लिया, लेकिन खिताब तो दूर फाइनल में पहुंचना भी नसीब नहीं हुआ। टीम ने 2000 और 2002 में भारत से लगातार 2 सेमीफाइनल गंवाए। 2006 में वेस्टइंडीज और 2013 में इंग्लैंड ने उन्हें सेमीफाइनल हराकर बाहर किया।

साउथ अफ्रीका 2004, 2009 और 2017 में तो ग्रुप स्टेज भी पार नहीं कर सकी। पहले खिताब के बाद टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी में 5 नॉकआउट मैच खेले, 4 सेमीफाइनल गंवाए। वहीं इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र क्वार्टर फाइनल भी साल 2000 में जीता। यानी टीम वर्ल्ड कप में 32 साल तो वहीं चैंपियंस ट्रॉफी में 26 साल से चोक करती आ रही है।

चोकर्स कहलाने लगी थी साउथ अफ्रीका-

चोकर्स यानी बड़े मौकों पर दबाव के आगे बिखर जाने वाले। साउथ अफ्रीका की काबिलियत के साथ ये काला साया 34 साल से साथ चल रहा था। वनडे, टेस्ट या फिर टी-20 हर फॉर्मेंट में अपने क्रिकेट का डंका बजा चुकी यह टीम एक ही वर्ल्ड कप फाइनल खेल सकी थी, उसमें भी टीम को पिछले साल भारत से हार मिल गई। टीम ने WTC फाइनल से पहले 12 सेमीफाइनल गंवाए। कभी बारिश ने धोखा दिया, कभी किस्मत ने। जीत कभी हासिल नहीं हुई।

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप

6 साल में पहली सफलता-

चैंपियंस ट्रॉफी, वनडे वर्ल्ड कप और टी-20 वर्ल्ड कप के बाद ICC ने टेस्ट फॉर्मेट का टूर्नामेंट भी 2019 में शुरू कर दिया। इसका नाम वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप यानी WTC रखा, इसमें टॉप-9 टीमों के बीच 2 साल तक 6-6 सीरीज खेली जाती हैं। पॉइंट्स टेबल के आखिर में टॉप-2 स्थानों पर रहने वाली टीमों में फाइनल होता है।

साउथ अफ्रीका WTC के शुरुआती 2 फाइनल तो नहीं खेल सकी, लेकिन तीसरे में रोमांचक ढंग से एंट्री की और इसे जीत भी लिया। टीम को फाइनल में पहुंचने के लिए एक समय 6 में से 5 टेस्ट जीतने थे। साउथ अफ्रीका ने अगली 3 सीरीज में पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश को हराया और खिताबी मुकाबले में एंट्री कर ली।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में भी साउथ अफ्रीका शुरुआती 2 दिन दबाव में नजर आई। टॉस जीतकर पहले बॉलिंग करते हुए ऑस्ट्रेलिया को 212 पर ऑलआउट जरूर किया, लेकिन टीम खुद 138 रन ही बना सकी। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया ने फिर 218 रन बनाकर 282 का टारगेट सामने रख दिया।

द लॉर्ड्स स्टेडियम में साउथ अफ्रीका को मुकाबले के तीसरे दिन सूरज का साथ मिला। शुरुआती 2 दिन बादल ज्यादा होने के कारण गेंद ज्यादा स्विंग हो रही थी, तीसरे दिन बादल छट गए और बैटिंग आसान हो गई। ऐडन मार्करम और टेम्बा बावुमा ने इसका फायदा उठाया और 147 रन की पार्टनरशिप कर टीम को जीत की दहलीज पर ला दिया। मार्करम ने शतक लगाकर, वहीं कगिसो रबाडा ने 9 विकेट लेकर टीम को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन बनाया। मार्करम प्लयेर ऑफ द फाइनल भी रहे।

बन ही गए वर्ल्ड चैंपियन-

साउथ अफ्रीका की WTC जीत के साथ क्रिकेट को अब तीनों फॉर्मेट में 8 अलग-अलग चैंपियन मिल चुके हैं। वनडे और टी-20 में कभी चैंपियन नहीं बने न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के नाम WTC का खिताब है। वहीं कभी WTC नहीं जीत सकीं इंग्लैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका, भारत और वेस्टइंडीज के पास वनडे और टी-20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी है। हालांकि, इन 8 टीमों में ऑस्ट्रेलिया इकलौती ऐसी टीम है, जिनके नाम ICC की सभी ट्रॉफी जीतने का रिकॉर्ड है। टीम ने 6 वनडे वर्ल्ड कप, 2 चैंपियंस ट्रॉफी, 1 टी-20 वर्ल्ड कप और 1 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीती है।

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

error: Content is protected !!