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आरएलपी (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल बोले- पायलट को गहलोत के घर नही जाना चाहिए था, ऐसी क्या मजबूरी थी? मैं वसुंधरा राजे से बिगड़ने के बाद कभी नहीं मिला…

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‘सचिन पायलट को गहलोत के घर नहीं जाना चाहिए था, ऐसी क्या मजबूरी थी? मैं वसुंधरा राजे से बिगड़ने के बाद कभी नहीं मिला।’

यह कहना है नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने कांग्रेस और बीजेपी पर मिलीभगत से सियासत करने और छोटे दलों को खत्म करने की साजिश करने का आरोप लगाया।

बेनीवाल ने कहा- मुख्यमंत्री कह रहे हैं कांग्रेस नेता रात के अंधेरे में मिलने आते हैं। मुख्यमंत्री खुद बताएं, अंधेरे में कौन-कौन कांग्रेस नेता मिलने आते हैं?

बेनीवाल ने डॉ. किरोड़ीलाल मीणा पर भी निशान साधा। कहा- छापे मारकर किरोड़ी खुद की सरकार को ही बदनाम कर रहे हैं। एसआई भर्ती रद्द करने के मुद्दे पर बोले- प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है। एसआई भर्ती के बाद आगे अग्नि वीरों के लिए आंदोलन होगा।

हनुमान बेनीवाल से खास बातचीत के मुख्य अंश-

आप एसआई भर्ती रद्द करने की मांग पर धरना दे रहे हैं, जबकि एक मत यह भी है कि जो बिना नकल किए अपनी मेहनत से क्वालिफाइड हुए हैं उनका क्या दोष है?

हनुमान बेनीवाल: पेपर लीक होने पर परीक्षाएं रद्द होती रही हैं। कांग्रेस राज में जब पेपर लीक हुए तब बीजेपी नेताओं ने आरपीएससी के पुनर्गठन करने का वादा किया था। बीजेपी के पोस्टर पर वसुंधरा राजे, राजेंद्र राठौड़, सतीश पूनिया, सीपी जोशी की फोटो थी और यह था कि भाजपा सरकार बनने पर एसआई भर्ती रद्द करेगी। आरपीएससी का पुनर्गठन करेगी। प्रधानमंत्री जब 2023 में वोट मांगने आए तो कहा था कि पाताल से भी पेपर माफिया को ढूंढ के निकाल लूंगा। यह तो उनके स्टैंड थे। हम तो धरना इसलिए दे रहे हैं कि राजस्थान में संघर्ष करने वाला कोई बचा नहीं है। इसलिए बच्चे कहां जाएं? मैंने लोकसभा में इसका दो बार मामला उठाया।

एसआई भर्ती में 55 के आसपास ट्रेनी एसआई गिरफ्तार हो चुके हैं। मंत्री खर्रा कह रहे थे कि 859 की भर्ती में से 200-300 अपनी मेहनत से पास हुए उनका क्या होगा, तो सरकार खुद ही मान रही है कि 500 फर्जी हैं। सुप्रीम कोर्ट कहता है कि कहीं भी भर्ती में 30-35 परसेंट घालमेल है, पेपर लीक होता है तो उसे रद्द करो। कई राज्यों की हाईकोर्ट ने भी आदेश दिए हैं।

सरकार ने तो हाईकोर्ट से समय मांग लिया है, कई मंत्री भी कह चुके कि हाई कोर्ट से ही फैसला होगा। जब हाई कोर्ट ही फैसला करेगा तो आपके धरना देने का औचित्य क्या है?

हनुमान बेनीवाल : हम सरकार को यह याद दिला रहे हैं। आपके लोगों ने ही शुरुआत की थी। आपने ही भर्ती रद्द करने की बात की थी तो अब पीछे क्यों हट रहे हो? सरकार की क्या मजबूरी है? फरवरी में हाई कोर्ट से टाइम मांगा, कोर्ट से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले से लोगों को निराशा हाथ लगी है। कहा गया 1 जुलाई का इंतजार करें। हम इंतजार नहीं करेंगे। हमने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा है, पीएम को उनका वादा याद दिलाएंगे।

मुख्यमंत्री के आसपास स्वार्थी लोगों का घेरा है, वे मजबूर हैं। सरकार को डर है कि भर्ती रद्द करने से कई रहस्य खुल जाएंगे। हम रुकने वाले नहीं हैं, हम दिल्ली कूच करेंगे, एसआई भर्ती को रद्द करवाएंगे।

भजनलाल जी जिनके बारे में कह रहे थे की रात के अंधेरे में कांग्रेस के नेता मिलने आते हैं, वे बड़े नेता कौन हैं? अजमेर से जयपुर तक पैदल मार्च करने वाले कांग्रेस नेता अब चुप क्यों हैं? राजस्थान तो पूछेगा, क्या नेताओं को जंग लग गई क्या? ये सारे के सारे बयानवीर हैं। बयान बदलते रहते हैं यह हमारी पीड़ा है।

आरपीएससी के पुनर्गठन की मांग कांग्रेस राज से उठ रही है। सचिन पायलट ने भी इसकी मांग उठाई है। अब यूआर साहू को आरपीएससी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है, क्या हालात बदलेंगे?

हनुमान बेनीवाल : यूआर साहू जैसे ईमानदार और साफ छवि के व्यक्ति को आरपीएससी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। अध्यक्ष बनते ही उन्होंने खुद कहा कि है संस्था को सुधारने में समय लगेगा, लेकिन कोशिश करेंगे। अकेला अध्यक्ष कुछ नहीं कर पाएगा। सारे मेंबर नॉन पॉलिटिकल लोगों को बनाओ। आप पॉलिटिकल लोगों को क्यों बना रहे हो? क्यों जाति के आधार पर इसमें नियुक्तियां कर रहे हो? वहां कोई जातिगत जनगणना थोड़े ही करवानी है।

यूपीएससी की तर्ज पर आरपीएससी की संरचना होनी चाहिए। यह बीजेपी का कमिटमेंट था। यह मैं इनको याद दिला रहा हूं। यूआर साहू अध्यक्ष बने हैं। इन्होंने ही एसआई भर्ती को रद्द करने की खुद सिफारिश की थी। उम्मीद है वो अपनी बात पर कायम रहेंगे।

आजकल आप सचिन पायलट को भी खूब टारगेट कर रहे हैं। इन तल्खियों की क्या वजह है? आरपीएएसी पुनर्गठन पर आप जो मांग उठा रहे हैं, इसकी शुरुआत पायलट ने ही अपनी सरकार में की थी?

हनुमान बेनीवाल : अब उनको लगता है कि इसका क्रेडिट किसी को चला जाएगा, इसलिए चुप हो गए। नेताओं का क्या है कि ये खुद किसी के लिए लड़ते नहीं और कोई दूसरा इन्हें लड़ता हुआ पसंद नहीं है। सचिन पायलट जब अशोक गहलोत की सरकार को गिराने के लिए मानेसर जा सकते हैं तो एसआई भर्ती रद्द करने के लिए युवाओं के साथ क्यों नहीं आ सकते? युवाओं के पक्ष में बयान जारी करने में क्या दिक्कत है? अभी तो बीजेपी की सरकार है। उसमें मांग उठाने में क्या दिक्कत है? जनता में इससे मैसेज जा रहा है कि पायलट बीजेपी के लोगों के नजदीक हैं।

आपके धरने में मंत्री डॉ. किरोड़ी आए थे, लेकिन इसके बाद उन्हें भी आपने निशाने पर ले लिया?

हनुमान बेनीवाल : धरने में तो डॉक्टर साहब अपने आप ही गए थे, मैं तो था नहीं। उन्होंने पहले वहां पता कर लिया कि मैं हूं कि नहीं हूं। उनका फोन मेरे पास आया था कि कहां हो? मैंने कहा मैं थोड़ा लेट आता हूं। मेरे पीछे से धरने में आकर चले गए। उनको लगा कि एसआई भर्ती रद्द हो गई तो उसका क्रेडिट कहीं हनुमान बेनीवाल को नहीं मिल जाए। डॉक्टर साहब की शुरुआत से आदत है। वो हमेशा इसी तरह करते हैं।

डॉ. किरोड़ी से अचानक बिगड़ कैसे गई, आप तो हाल तक बड़ी तारीफ करते रहते थे?

हनुमान बेनीवाल : बिगड़ी नहीं, वो हमें अकेले छोड़कर चले गए थे। उन्होंने जो काम हाथ में लिया उसे पूरा करना चाहिए, नहीं किया तभी तो मुझे आना पड़ा। सब ने हाथ खड़े कर दिए तब मैं मैदान में आया। अब मैं इसको अंतिम नतीजे तक ले जाकर रहूंगा, पूरी ताकत से लड़ूंगा। लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है।

जब दुख के दिन थे तो मैं डॉक्टर साहब के साथ था। वो मुझे छोड़ कर चले गए। उस समय घनश्याम तिवाड़ी, डॉक्टर किरोड़ीलाल जी और हम तीनों मिलकर चुनाव लड़ते तो 60 सीट आ जाती, राज हम बनाते।

आप मुख्यमंत्री को लेकर जिस तरह के बयान देते हैं उनका स्तर अच्छा नहीं माना जा रहा, पहली बार बने मुख्यमंत्री से इतनी नाराजगी क्यों है?

हनुमान बेनीवाल : मुख्यमंत्री से मेरी पहले कौन सी दोस्ती थी? मुख्यमंत्री खुद के स्तर पर कोई फैसला नहीं ले पाते, यह हमारी पीड़ा है। सीएम तो खुद कहते हैं कि उनका एसआई भर्ती रद्द कराने का कोई कमिटमेंट था ही नहीं। इनका कमिटमेंट तो इसलिए नहीं था कि विपक्ष के वक्त वे कहीं पिक्चर में ही नहीं थे। जिन नेताओं ने एसआई भर्ती रद्द करने की आवाज उठाई थी वे सब मैदान छोड़कर चले गए।

भजनलाल से हमारी कोई नाराजगी नहीं है। आपको राजस्थान के जवानों के साथ न्याय करना चाहिए। पेपर लीक की बड़ी मछलियों को अरेस्ट करना चाहिए। मैं तो बीजेपी को उनका वादा याद दिला रहा हूं।

इस मुद्दे पर सीएम से कभी बात हुई?

हनुमान बेनीवाल : मुख्यमंत्री बनने के बाद मेरी भजनलाल शर्मा से कभी बात नहीं हुई। मैं बात किसलिए करूं? मैं तो लगातार मुद्दे उठा ही रहा हूं। इसमें सीएम से बात करने की कहीं जरूरत महसूस नहीं होती। मेरा मूल मुद्दा है कि सीएम को युवाओं की आवाज सुनकर न्याय करना चाहिए।

आपने हाल ही में कुछ जातीय टकराव वाले बयान दिए। धरने में इतिहास की बातें उठाने का क्या मतलब था?

हनुमान बेनीवाल : मैंने किसी समाज को टारगेट नहीं किया। मैंने तो कहा था कि यहां के राजाओं ने शुरू से आगे बढ़कर मुगलों से वैवाहिक संबंध स्थापित किए। मैंने जाति का नाम नहीं लिया। हम चाहते हैं कि जाट-राजपूत भाईचारा बना रहे, गुर्जर मीणा साथ रहें, ब्राह्मण साथ रहें, सब जातियां प्रेम से रहें।

आपका टोन उकसाने और आहत करने वाला था, ऐसा कई लोग मान रहे हैं?

हनुमान बेनीवाल : मैंने किसी जाति का नाम नहीं लिया। अपने आप इस तरह कोई आहत हो तो इसका कोई इलाज नहीं है। मेरे से पहले तो बहुत से लोगों ने राजस्थान में क्या-क्या नहीं कहा। लेकिन कई नेता राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि हनुमान बेनीवाल के खिलाफ बोलेंगे तो समाज के नेता बन जाएंगे। बस इतनी सी सोच है उनकी। मैं जिस समाज को जरूरत पड़ी उसके साथ खड़ा रहा हूं। ईडब्ल्यूएस आरक्षण की मांग का मैंने समर्थन करते हुए पूरा साथ दिया था, फिर आप कैसे कह सकते हैं कि मैं जानबूझकर टारगेट करता हूं।

सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या मतलब है?

हनुमान बेनीवाल : फिर इतिहास पढ़ाना ही बंद कर दीजिए। पीएम को कह के इतिहास ही नया लिखवा दो। कुछ राजा जाट समाज के थे उनको भी ले आएंगे, कुछ गुर्जर मीणा राजा थे उनको भी इतिहास में जगह मिल जाएगी। हमारे राजा खो गए, दूसरों ने कब्जा कर लिया उन सबको वापस लाओ। जो क्षत्रीय लड़ाके थे, वो सबके थे, राजा एक जाति के नहीं थे। अगर इतिहास में कोई गलत बात लिखी हुई है तो सीएम भजनलाल पीएम को प्रस्ताव भेजकर ठीक करवाने की मांग करें, मैं उनका साथ दूंगा।

सचिन पायलट ने हाल ही में अशोक गहलोत के बंगले पर जाकर उन्हें राजेश पायलट की पुण्यतिथि के कार्यक्रम का निमंत्रण दिया था। गहलोत कार्यक्रम में गए, वहां गहलोत ने कहा कि हम दोनों दूर कब थे?

हनुमान बेनीवाल : सचिन पायलट की जगह मैं होता तो कभी नहीं जाता। मैं तो मेरी कह सकता हूं। मेरी वसुंधरा राजे से टूट गई, कभी नहीं गया। मैंने अलग पार्टी बनाई। मैं उनके साथ नहीं जा सकता। सचिन पायलट को अशोक गहलोत के घर नहीं जाना चाहिए था।

इसका मतलब तो यही हुआ कि अशोक गहलोत आज भी कांग्रेस के बड़े नेता हैं। यह सही है कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी ने कहा कि आप वहां जाइए। आखिर पायलट को गहलोत के यहां भेज तो दिया न। जब यही करना था तो 10 साल पहले ही बुला लेते।

आखिर गहलोत के घर जाने की क्या मजूबरी थी? कोई तो मजबूरी होगी तभी तो गए हैं। जो अशोक गहलोत की सरकार गिराने मानेसर चले गए और सरकार में रहते चाहे जो बयान देते थे, अचानक क्या हो गया कि उनके घर चले गए?

पायलट कोई सीएम की शपथ लेने वाले तो थे नहीं। चुनाव को साढ़े तीन साल बाकी हैं। राजस्थान की जनता यह भी देख रही है कि पायलट साहब ने अशोक गहलोत से लड़ाई लड़ी और अब उन्हीं से हाथ मिला लिया। हनुमान बेनीवाल के लिए कोई यह नहीं कहेगा की लड़ाई लड़कर झुक गया या समझौता कर लिया।

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